KRIYA

Wednesday, 25 June 2014

Kriya 2 Omkaara kriya in Hindi(क्रिया 2:-- ॐकार क्रिया)


                                          ओं श्री योगानंद गुरुपरब्रह्मणे नमः

                     
क्रिया 2:-- 
ॐकार क्रिया—

सीधा वज्रासन, पद्मासन अथवा सुखासन मे ज्ञानमुद्रा लगाके बैठिए! कूटस्थ मे दृष्टि रखे! पूरब दिशा अथवा उत्तर दिशा की और मुँह करके बैठिए! शरीर को थोडा ढीला रखीए! खेचरी मुद्रा में रहिये! मुह पूरा खोलके ही रखना चाहिये! जीब को पीछे मूड के तालु में रखना चाहिए! इसी को खेचरी मुद्रा कहते है!
अब मूलाधाराचक्र का उप्पर मन और दृष्टि रखना चाहिए! दोनों कानों का रंध्र दोनों अंगुष्ठ अंगुलियों से बंद करना चाहिए! दोनों नेत्रों बंद रखना चाहिए! दोनों आंखों का कोनों को कनिष्ठ अंगुलियों थोड़ा दबाना चाहिए! बाकी अंगुलियों को ललाट का उप्पर रखना चाहिए! अब दोनों नेत्रों को कनिष्ठ अंगुलियों से चार बार क्लाक् वैज(clockwise) मन में ॐकार बोलते हुए सरलता से घुमाना चाहिए!  
अब स्वाधिष्ठानचक्र का उप्पर मन और दृष्टि रखना चाहिए! दोनों नेत्रों को कनिष्ठ अंगुलियों से छे बार क्लाक् वैज(clockwise) मन में ॐकार बोलते हुए सरलता से घुमाना चाहिए!
अब मणिपुरचक्र का उप्पर मन और दृष्टि रखना चाहिए! दोनों नेत्रों को कनिष्ठ अंगुलियों से दस बार क्लाक् वैज(clockwise) मन में ॐकार बोलते हुए सरलता से घुमाना चाहिए!
अब अनाहतचक्र का उप्पर मन और दृष्टि रखना चाहिए! दोनों नेत्रों को कनिष्ठ अंगुलियों से बारह बार क्लाक् वैज(clockwise) मन में ॐकार बोलते हुए सरलता से घुमाना चाहिए! अब विशुद्धचक्र का उप्पर मन और दृष्टि रखना चाहिए! दोनों नेत्रों को कनिष्ठ अंगुलियों से सोलह बार क्लाक् वैज(clockwise) मन में ॐकार बोलते हुए सरलता से घुमाना चाहिए! अब आज्ञा नेगटिव चक्र का उप्पर मन और दृष्टि रखना चाहिए! दोनों नेत्रों को कनिष्ठ अंगुलियों से अठारह बार क्लाक् वैज(clockwise) मन में ॐकार बोलते हुए सरलता से घुमाना चाहिए!
अब आज्ञा पाजिटिव चक्र का उप्पर मन और दृष्टि रखना चाहिए! दोनों नेत्रों को कनिष्ठ अंगुलियों से बीस बार क्लाक् वैज(clockwise) मन में ॐकार बोलते हुए सरलता से घुमाना चाहिए!
अब आरोहणा क्रम में अर्थावृत्त समाप्त हुए है! और अर्थावृत्त बाकी है! इस के लिए पुनः आज्ञा पाजिटिव चक्र से अवरोहणा क्रम में शुरू करना चाहिए!
अब आज्ञा पाजिटिव चक्र का उप्पर मन और दृष्टि रखना चाहिए! दोनों नेत्रों को कनिष्ठ अंगुलियों से बीस बार क्लाक् वैज(clockwise) मन में ॐकार बोलते हुए सरलता से घुमाना चाहिए!
अब आज्ञा नेगटिव चक्र का उप्पर मन और दृष्टि रखना चाहिए! दोनों नेत्रों को कनिष्ठ अंगुलियों से अठारह बार क्लाक् वैज(clockwise) मन में ॐकार बोलते हुए सरलता से घुमाना चाहिए!
अब विशुद्धचक्र का उप्पर मन और दृष्टि रखना चाहिए! दोनों नेत्रों को कनिष्ठ अंगुलियों से सोलह बार क्लाक् वैज(clockwise) मन में ॐकार बोलते हुए सरलता से घुमाना चाहिए!
अब अनाहतचक्र का उप्पर मन और दृष्टि रखना चाहिए! दोनों नेत्रों को कनिष्ठ अंगुलियों से बारह बार क्लाक् वैज(clockwise) मन में ॐकार बोलते हुए सरलता से घुमाना चाहिए! अब मणिपुरचक्र का उप्पर मन और दृष्टि रखना चाहिए! दोनों नेत्रों को कनिष्ठ अंगुलियों से दस बार क्लाक् वैज(clockwise) मन में ॐकार बोलते हुए सरलता से घुमाना चाहिए!
अब स्वाधिष्ठानचक्र का उप्पर मन और दृष्टि रखना चाहिए! दोनों नेत्रों को कनिष्ठ अंगुलियों से छे बार क्लाक् वैज(clockwise) मन में ॐकार बोलते हुए सरलता से घुमाना चाहिए!
अब मूलाधारचक्र का उप्पर मन और दृष्टि रखना चाहिए! दोनों नेत्रों को कनिष्ठ अंगुलियों से चार बार क्लाक् वैज(clockwise) मन में ॐकार बोलते हुए सरलता से घुमाना चाहिए!  अब पूरा वृत्त समाप्त हुए है! 
अब फिर मूलाधाराचक्र से आरम्भ करके आज्ञा पाजिटिव चक्र तक, फिर आज्ञा पाजिटिव चक्र से मूलाधाराचक्र तक पांच वृत्त समाप्त करना चाहिए! छठा वृत्त में आज्ञा पाजिटिव चक्र यानी कूटस्थ तक जाके उधर रुखना चाहिए! अब आज्ञा पाजिटिव चक्र में मन और दृष्टी लगा के ध्यान करना चाहिए!


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