KRIYA

Wednesday, 5 November 2014

क्रियायोगासाधना प्रार्थना

 शक्तिपूरक अभ्यास का पहले प्रार्थना
हे परमपिता, आप ही मेरा इस शरीर को स्थितिवंत कटते हो! मेरे अंदर चेतना पूर्वक आरोग्य, इच्छा, स्फूर्ति, और सिद्धि जागृती करो! मेरा शरीर और मन सदैव नित्य यौवन रहनेदो! ॐ शांति, ॐ शांति, ॐ शांति!    


                                              प्रार्थना
ब्रह्मानंदम परमसुखादम केवलं ज्ञान मूर्तिम्
द्वन्द्वातीतं गगन सदृशं तत्वमश्याधिलक्ष्यम्
एकं नित्यं विमलं अचलं सर्वधि साक्षी भूतं
भावातीतं त्रिगुणरहितम् सद्गुरुम् तम् नमामि!  
हे परमपिता, जगन्माता, बन्धु-सखा, प्रियतम प्रभु, भगवान श्रीकृष्ण, जीसस क्रैस्त, महावतार बाबाजि, लाहिरी महाशय महाराज, ञानावतार श्रीयुक्तेस्वर स्वामीजि, प्रेमावतार प्रियगुरु परमहंस श्री योगानन्द स्वामीजि, तथा सभी धर्मो के ऋषि मुनियो, मै आप सभी को प्रणाम करता हु!
असतोमा सद्गमय, तमसोमा ज्योतिर्गमय, म्रुत्योर्मा अम्रुतम गमय!
हे परमपिता, आपके प्रेम की ज्योति मेरे ह्रुदय मे सदैव प्रज्वलित रहे और मै इस प्रेम को सभी के ह्रुदयों मे जाग्रुत कर सकू ! आप मेरी इस प्रार्थना को स्वीकार करो!
गुरुर् ब्रह्मा गुरुर विष्णुह गुरुर् देवो महेश्वरः
गुरु साक्षात् परब्रह्म तस्मैश्री गुरवेनमः
                        निरोग काया के लिये प्रार्थना
हे परमपिता, आप सर्वव्यापी है! आप अपनी सभी संतानो मे विद्यमान है! अपनी आरोग्यदायिनी उपस्थिति को उनके शरीर् मे प्रकट करे, 
हे परमपिता, आप सर्वव्यापी है! आप अपनी सभी संतानो मे विद्यमान है! अपनी आरोग्यदायिनी उपस्थिति को उनके मन मे प्रकट करे,
हे परमपिता, आप सर्वव्यापी है! आप अपनी सभी संतानो मे विद्यमान है! अपनी आरोग्यदायिनी उपस्थिति को उनके आत्मा मे प्रकट करे, 
विश्व शांति और विश्व मानव सौभ्रात्रुत्व के लिये ओम्

हे परमपिता, आप अपनी विश्वशक्ति का माध्यम से शक्ति पूरण करने प्रक्रिया द्वारा शरीर का स्वास्थता लाने का पद्धति हमे को सिखावो  
हे परमपिता,  धारणा और प्रसन्नता प्रक्रियों द्वारा मन् का स्वास्थता लाने का पद्धति हमे सिखावो
हे परमपिता, आप का उप्पर ध्यान नाम का दिव्य औषधि से आत्म विषयैक अज्ञान रुग्मता को सजाव करने का पद्धति हमे सिखावो


  



ॐजयजगदीशहरे,स्वामीजयजगदीशहरे |
भक्तजनोंकेसंकट,क्षणमेंदूरकरे |ॐजयजगदीशहरे ||
जोध्यावेफलपावे,दुःखबिनसेमनका,स्वामीदुःखबिनसेमनका |
सुखसम्पतिघरआवे,सुखसम्पतिघरआवे,कष्टमिटेतनका |ॐजयजगदीशहरे ||
मातपितातुममेरे,शरणगहूंकिसकी,स्वामीशरणगहूंमैंकिसकी |
तुमबिनऔरनदूजा,तुमबिनऔरनदूजा,आसकरूंमैंजिसकी | ॐजयजगदीशहरे || तुमपूरणपरमात्मा,तुमअन्तर्यामी,स्वामीतुमअन्तर्यामी|
पारब्रह्मपरमेश्वर,पारब्रह्मपरमेश्वर,तुमसबकेस्वामी |ॐजयजगदीशहरे ||
तुमकरुणाकेसागर,तुमपालनकर्ता,स्वामी तुमपालनकर्ता
मैंमूरखफलकामीमैंसेवकतुमस्वामी,कृपाकरोभर्ता |ॐजयजगदीशहरे ||
तुमहोएकअगोचर,सबकेप्राणपति,स्वामीसबकेप्राणपति,
किसविधिमिलूंदयामय,किसविधिमिलूंदयामय,तुमकोमैंकुमति | ॐजयजगदीशहरे ||
दीन-बन्धुदुःख-हर्ता,ठाकुरतुममेरे,स्वामीरक्षकतुममेरे |
अपनेहाथउठाओ,अपनेशरणलगाओद्वारपड़ातेरे |
ॐजयजगदीशहरे ||
विषय-विकारमिटाओ,पापहरोदेवा,स्वमीपापहरोदेवा,
श्रद्धाभक्तिबढ़ाओ,श्रद्धाभक्तिबढ़ाओ,सन्तनकीसेवा |
ॐजयजगदीशहरे  ||
तन मन धन है तेरा सब कुछ है तेरा
तेरा सब कुछ तुझ को अर्पण क्या लागे मेरा
ॐजयजगदीशहरे ||

उपनिषद् प्रार्थना :---
ॐ सर्वेषाम् स्वस्तिर्भवतु ॐ सर्वेषाम् शांतिर्भवतु
ॐ सर्वेषाम् पूर्णंभवतु ॐ सर्वेषाम् मंगळंर्वतु
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः  ॐ सर्वे भद्राणि पश्यन्तु
ॐ सर्वे सन्तु निरामयाः मा कश्चित् दुःख भाग् भवेत्
ॐ असतोमा सद्गमय तमसोमा ज्योतिर्गमय मृत्योर्मा अमृतं गमय
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम् पूर्णात् पूर्ण मुदच्युते
पूर्णश्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यतु
ॐ शान्तिः ॐ शान्तिःॐ शान्तिः
ॐ नमो नमस्तेस्तु सहस्रकृत्वा पुनस्च भूयोपि नमो नमस्ते
नमःपुरस्ताधतपृष्ठतस्थे नमोस्तुते सर्वता एव सर्वं  
ॐ शान्तिः ॐ शान्तिःॐ शान्तिः






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