KRIYA

Sunday, 14 December 2014

गोमाता --- वन्दनं

                   गोमाता --- वन्दनं
आप को यह छीज पता है? दुनिया में प्राणवायु लेकर प्राणवायु छोड़ने वाला पशु हिन्दुस्तान का गोमाता है! हम हर रोज उस का साथ थोड़ा समय बिताके उस का थोड़ा घास खिलाने से हमारा अन्दर का अनारोग्य को गोमाता अपना नाक का अन्दर का एक ग्रंधि का माध्यम से ग्रहण करेगा! गोमाता घास चराने का समय में उस रोग का ठीक करनेवाला जडी-बूटी घास खाके हम को दूध देगा! उस दूध पीनेसे हम को तंदुरुस्ती मिलेगा! इसीलिए गोमाता होने से उस घर में भगवान होगा करके पुराणोंमें कहते थे! हमारा भारत में 36 प्रकार का गोजाती है! दुनिया में अजीब प्रकार का व्याधियों का हेतु कही प्रकार का गोजाती का विनाश हुआ! परन्तु भारत का गोजाती का उप्पर इन व्याधियों का प्रभाव नही हुआ! धूप वर्ष शीतल सारे वातावरणों और शास्त्रीय बदलाओं इत्यादि से सहन किया भारत का गोजाती! आधुनिक वैज्ञानिक शास्त्रवेत्तों यह विषय आश्चर्यजनक किया! कोई भी शास्त्रवेत्ता को यह विषय पचन नहीं होरहा है! इसीलिए पाश्चात्यलोग हमारा गोमाता को आयात करते है!

गोमूत्र में 47 प्रकार का मूलापादार्ध है! पुराणों में कहागया पंचाकव्यं का 64 सूत्रों का मुताबिक़ शास्त्रवेत्तों विविध प्रकार का परिशोधन किया है! 300 विविध प्रकार का रोग निरोधक औषधियों का गोमूत्र और गोंबर में से आविष्कार किया है! और  25 विविध प्रकार का  व्यवसाय संबंधित औषधियोंका भी आविष्कार हुआ! इन समस्त औषधियों प्रक्रितिसिद्ध है! इन का तयारी के लिए कोई भी रसायनों का आवश्यकता नहीं है! इसीलिए हम अपना गोमाता का रक्षा करेंगे! हमारा संस्कृति का परिरक्षण करेंगे! तब आरोग्य और आनंद अपना होजाएगा!  जै भारतमाता! जै जै भारतमाता!  

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