शरीर विज्ञानशास्त्र (Anatomy) —क्रियायोग Part 1
शरीर विज्ञानशास्त्र (Anatomy) —क्रियायोग
भौतिक और आध्यात्मिक व्यत्यास मनुष्य और
पशु इत्यादि नीचा जातियों का बीच ने अनेक है! उदाहरण के लिए:
आत्मविश्वास,
सौंदर्योपासना, हास्य प्रवृत्ति, मरण
तथ्य इति ज्ञान, काल का
ज्ञान, शब्दों
का बीच का व्यत्यास, शब्द
ज्ञान, संगीत
ज्ञान, जीवित
परमार्थ ज्ञान, शीतोष्ण
स्थितियों का ज्ञान, शीतोष्ण
स्थितियों का अनुसार कपड़ा धरने का ज्ञान, रेल, सड़क,
आकाश, और समुद्र का उप्पर सफ़र करने का ज्ञान, सगोत्रीय और एक ही कुटुंब का लोगों का साथ विवाह अथवा संभोग नहीं करने
का ज्ञान, आलोचना
पूर्वक काम करने का ज्ञान, आवेश का
साथ अथवा जन्मतः आनेवाले स्वभाव(instinct) का मुताबिक़ नहीं करने का ज्ञान, प्रेम, आप्यायता,
सहोदरभाव का ज्ञान, सुंदर कपड़ा पहने का ज्ञान, शरीर स्वभाव का मुताबिक़ और आरोग्य परिस्थितियों का मुताबिक़ आहार लेने
का ज्ञान, कृषि से
सभी चीजों मी आधिक्यता पाने का ज्ञान, अपना और साथियों का आरोग्य के लिए भगवान को प्रार्थना करने का ज्ञान,
इत्यादि बहुत है!
इसी हेतु मनुष्य मानव राक्षस, मानव पशु, मानव
मानव, अवस्थों
पार करके मानव देवता बनना चाहिए! उस के
लिए एक ही मार्ग क्रियायोग साधना है!
कुछ भी गरम वस्तु को स्पर्श करने से हम अपना हाथ तुरंत वापस लेंगे! हमारा पञ्च ज्ञानेंद्रियों में एक त्वचा है! त्वचा उस उष्णता को ग्रहण करके संवेदक नाड़ियों (senser nerves) का माध्यम से उस समाचार भेजा (cerebrum) को संकेत भेजता है! तब दिमाग प्रेरक तंत्रिकाओं(motor nerves) का माध्यमे से ‘हाथ पीछे मोड़ने का’ संदेश भेजता है! इसी रीती, दृष्टि, श्रवण, घ्राण, और रूचि इत्यादि ज्ञानेंद्रियों का माध्यम से मिला समाचारों का तदनुसार भेजा (cerebrum)से आदेश मिलेगा! परंतु अनेक संदर्भों में अनुभव पाने का पूर्व ही हम संवेदक नाड़ियों (senser nerves) और प्रेरक तंत्रिकाओं(motor nerves) का प्रमेय बिना ही कार्य का उपक्रमण करते है! उड़ा हरण के लिए: सर्प, वृश्चिक इत्यादि विष चीजो को देखते ही हम उन से भागने अथवा दूर हटने का प्रयत्न करते है! आलोचना सरळी कारण मनस- (causal mind), इन आलोचनावों को रखने के लिए
(Store) अवचेतना मनस (sub-conscious
mind), और उन
आलोचनावों को कार्यरूप देने के लिए चेतना मनस (conscious
mind), हम यानी मनुष्य में है इति इस का अर्थ! इस में स्वल्प मात्र संदेह भी नहीं है!
कारण
मनस (causal mind) का प्रतीक बड़ा दिमाग (big mind- cerebrum) में भावों और प्रणालिकाएं (Ideas & plans) का रचना होता है! अवचेतना मनस (sub-conscious
mind) का प्रतीक छोटा भेजा में(small- cerebellum) इन भावों और प्रणालिकाएं का कार्यान्वित करने ( energy required for execution of ideas
& plans) शक्ति मिलता है! चेतना
मनस (conscious mind) का प्रतीक अल्प
भेजा यानी मस्तिष्क स्तम्भ(primitive mind- brain stem)में इन कार्यो का मूर्त रूप देना होता है!
आत्मज्ञान जन्मतः केवल मनुष्य का ही भगवान ने दिया हुआ वर है!
इस को व्यर्थ करना अविवेक है! इसी कारण आइए,
क्रियायोग
सीखेंगे, परमात्मा का अनुसंधान
करेंगे, जीवित परमार्थ को
साकल्य करेंगे!
भेजा का विभाजन: 1) बड़ा दिमाग (cerebrum), 2) छोटा भेजा (cerebellum), 3) मस्तिष्क स्तम्भ(primitive mind- brain
stem) 4)डैयंसेफलान्(diencephalon)यानी हैपोथलमस् और थलमस् (thalamus and
hypothalamus), 5) लिंबिक् सिस्टम् (limbic system), और 6) रेटिकुलर याक्टिवेटिंग (reticular
activating system).
अब इन
का बारे में संग्रह में चर्चा करेंगे!
बेजा का काम:
मनुष्य का शरीर में दिमाग
अत्यंत मुख्य भाग है! वह बुद्धि/ज्ञान केंद्र है! वह इंद्रिय वृत्तियों और उन का
भावों का समझने और समझाने में पात्र लेता है! वह शरीर का गति विधान का आरंभ (initiate) करता है! वह रक्षित द्रव्यों(protective fluids) का साथ एक हड्डियों का घोसला (nest of bones) में उपस्थित होता है!
भेजा का
निर्माण:
भेजा को तीन भागों में विभाजन कर सकता है! वे: आगे का भेजा(FOREBRAIN), मध्यभेजा(MID
BRAIN), और पीछे का भेजा (HIND BRAIN) इति! इन तीनों मिलके एक साथ एक ही वास्तु
जैसा काम करेगा! हर एक भेजा का अपना अपना निर्दिष्ट और निर्देशन काम सोपा गया है!
पीछे का भेजा(HINDBRAIN): मेरुदंड का उप्पर पुरजा, मेरुदंड स्तंभ, और छोटा भेजा (cerebellum) तीनों मिलके पीछे
का भेजा(HINDBRAIN) का नाम से कहाजाता है! श्वास, ह्रदय विस्पंदन, और क्रीड़ा समय में
काम करने के लिए उपक्रमण करनेवाला वस्तु यह पीछे का भेजा(HINDBRAIN) ही है!
मध्यभेजा(MID BRAIN): मेरुदंड का सब से उप्पर का भाग मध्यभेजा(MID BRAIN) है! कार्य का अनुसार प्रतिक्रिया (Reflex actions) करना, नेत्रों को हिलाने का काम, और प्रयत्न पूर्वक करने कार्यो(voluntary
movements) को नियंत्रण
करना इस का धर्म (duty) है!
आगे का भेजा(FOREBRAIN): आगे का भेजा(FOREBRAIN) बहुत बड़ा है! वह विकास हुआ भाग है! इसका
अंदर का निर्माणों बुद्धी कार्यों(source of intelligence) का मूल है!
स्मृतियों(memories), प्रणालिका (plans)रचना, ऊहागान और भावोद्वेग (ideas
& imaginations), ग्रंथपठन् (book reading), मित्रों को पहचानना, खेल कूद में भाग
लेना,
इन सब का
मूल आधार बड़ा भेजा(cerebrum) ही है! गहरा दरार (deep cracks), विभाजन (fissure) का माध्यम
से यह बड़ा दिमाग दो भाग में विभाजन होता है! इन दरार और fissure का आधार(base) का तंत्रिकायों का रेशा (fibre) का माध्यम से
ये दोनों संभाषण (communicate) करते है!
बड़ा भेजा(cerebrum) का दोनों भाग (Hemispheres) एक दूसरा का दर्पण का प्रतिबिंब जैसा है!
परंतु वे दोनों का स्वभाव भिन्न है! उदाहरण:
बाएँ अर्थ गोळ में शब्दों (words) बनाने का सामर्थ्य है! दाहिने अर्थ गोळ
वास्तविकता के प्रथक(abstract) कार्यो को संभालने में नियंत्रण रखता है!
दाहिने अर्थ गोळ बाएँ अर्थ गोळ बड़ा भेजा(cerebrum) का नियंत्रण करेगा! इसी हेतु दाहिने अर्थ
गोळ में धक्का(stroke) लगाने से बाएँ अर्थ गोळ बड़ा भेजा(cerebrum) में लकवा आयेगा!
भाषा, तर्क, विश्लेषण(language, reasoning
and analysis) और कुछ संचार (communications) बाएँ अर्थ
गोळ बड़ा भेजा(cerebrum) में संभव होता है! इसी कारण क्रियायोग साधक ‘ॐ; शब्द दाहिने कान में सुनाने को कहते है! संकेत (sensory input), शब्द और दृष्टि का ज्ञान, सृजनात्मकता, चारों ओर क्या होरहा है इति ज्ञान(spatial-temporal
awareness) ए सब दाहिने अर्थ गोळ में होता है!
मनुष्य को तीन शरीर है!
वे स्थूल, सूक्ष्म, और कारण इति तीन शरीर है! पीछे का
भेजा(Hind Brain) स्थूल,
मध्यभेजा(Mid Brain) सूक्ष्म, और आगे का भेजा(Fore
Brain) कारण शरीरों का प्रतीके
है!
आगे का भेजा(Fore Brain) ऊहावों का निलय है! मध्यभेजा(Mid Brain) शक्ति का प्रतीक है! आगे का भेजा(Fore Brain) ऊहाएं और प्रणालीकावों को पालन करने
केंद्र है! इसी हेतु आगे का भेजा(Fore Brain) और पीछे का भेजा(Hind Brain) दोनों का समन्वयकर्ता है! इसकेलिए शक्ति
का अवसर है! उस शक्ति इस मध्यभेजा(Mid Brain) देता है! पीछे का भेजा(Hind Brain) इन कार्यो का रूप देता है! यानी
कार्यकर्ता है!
हर एक अर्थ गोळ बड़ा भेजा(cerebrum) को अनेक भागो में और दळों में(sections, or lobes) विभाजन करा सकता है! हर एक भाग और दळ को
एक एक महत्वपूर्ण कार्य सोपा अथवा निर्देशित् किया हुआ है!
आध्यात्मिक रूप में भी
इस तीन शरीर को पञ्च कोशो में विभाजन किया है! वे है: 1) अन्नमय कोश, 2) प्राणमयकोश, 3) मनोमय कोश,4) विज्ञानमय कोश, और 5) आनंदमय कोश!
स्थूलशरीर (पीछे का भेजा-Hind Brain) अन्नमय
कोश है! यह जड़ (inert) है! यह अपना काम करते जाएगा,
क्या, कहा, क्यों
इत्यादि प्रश्न नहीं होगा इधर!
प्राणमयकोश, मनोमय कोश, और विज्ञानमय कोश, इन तीनों मिलके
सूक्ष्म शरीर (मध्यभेजा--MID BRAIN) होता है! प्राणमय कोश का अर्थ केवल प्राणशक्ति है! मनोमय कोश का अर्थ
विचार करने शक्ति है! विज्ञानमय कोश का अर्थ ‘मै क्या कर रहा हु इति ज्ञान’ है! इन तीनों इन सूक्ष्म शरीर (मध्यभेजा--MID BRAIN) को होता है!
और 5) कारण शरीर(causal body) (आगे का भेजा--FOREBRAIN) आनंदमय कोश है! अपना कार्य में आनंद पाना को
आनंद कहते है! आनंद का अर्थ केवल संभोग में ही नहीं, इतर विषयों यानी ग्रंथ पठन, प्रकृति आराधन, सौंदर्योपासन् इत्यादि बहुत सारे है! आखरी
में क्रियायोग साधना में आनंद पाना ही असली आनंद है! केवल मनुष्य जन्म में ही ऐसी परमानंद पाना
साध्य है!
1) आगे का भाग (Frontal lobe) 2) पार्श्विक भाग (Parietal
lobe)
अ)गति (movement) अ) वाम पक्ष से
दाहिने पक्ष का ओर पढ़ने का ज्ञान(knowing right from left)
विचारों आरम्भा करना (Thinking
initiation) आ) इन्द्रिय ज्ञान अथवा अनुभूति (sensation)
इ) स्मृति (memory) इ) पढना(reading)
ई) तर्कानुसार निर्णय लेना ई) महत्वपूर्ण बंधो को पहचानना
उ)प्रवर्तन (Behaviour - emotions) 4) (मस्तक के पिछले
भाग) (Occipetal lobe)
ऊ) बोलना (Speaking) अ) दृष्टि(Vision) आ) रंग अन्धता (colour blindness)
3) कनपटी का पास भाग (Temporal
lobe) छोटा भेजा (Cerebellum)
अ) भाषा ज्ञान (understanding
language) अ) समतुल्यता(balance) आ) समन्ययत्व(coordination)
आ) प्रवार्तना (Behaviour) इ)मांसपेशी नियंत्रण (fine muscle control)
इ) स्मृति(memory) ई) श्रवण (Hearing)
5) मष्तिष्क स्तंभ (Brain
stem)
अ)श्वास(breathing), आ) रक्त चाप(blood
pressure), इ) हृदय स्पंदन(Heart
beat), ई) पी जाना (swallowing),उ) अप्रमत्तता/निद्रा (alertness/sleep), ऊ)शरीर शीतोष्ण
स्थिती (body
temperature), ऋ) पाचन शक्ति (digestion).
ए ललाट(forehead) का दोनों
ओर यानी वाम और दाहिने पक्ष में प्रत्यक्ष (directly) उपस्थित है! प्रणालीका रचना, भविष्यत का आलोचना, तार्किक वादन, ये सब इन्ही दोनों आगे का दो भाग(two frontal lobes) में होता
है! इन आगे का दो भाग या दळों(two frontal lobes) का पीछे
प्रेरक क्षेत्र(motor
area) उपस्थित है! यह अप्रयातना पूर्वक (voluntary) करने कार्यो का नियंत्रण करेगा! बाएँ भाग का(frontal lobe) भाग या दळ का समीप मे ब्रोका(Broca’s area) क्षेत्र उपस्थित है! यह विचारियों को शब्दरूप में बदल् देगा!
यह आनंदमय कोश का प्रतीक है!
दिवार जैसा होने दो पार्श्विक भाग (parietal lobes): दो आगे भागों (Frontal lobe) का पीछे दिवार जैसा होने दो पार्श्विक भाग (parietal lobes) अथवा दळों होता है प्रेरक क्षेत्र(motor area) का साथ जोड़ा हुआ दो पार्श्विक भाग (parietal lobes) आगे तरफ इन्द्रिय ज्ञान अथवा अनुभूति क्षेत्र(primary sensory areas) होता है! ए क्षेत्रों शीतोष्णस्थिती(temperature), रूचि(taste), स्पर्श(touch), शरीर गतिविधि(body movements), इन सब का बारे में विषय सेकरण(information) करता है! पढ़ना(reading), गणित(Arithmatic), इत्यादियो में भी सहायता करेगा ये क्षेत्र!
यह क्षेत्र विज्ञानमय क्षेत्र का प्रतीक है!
नेत्र संबंधित दळों(occipital lobes): भेजा का पीछे भाग
में दो नेत्र संबंधित दळों(occipital
lobes) होता है! ये दोनों दृष्टि(vision) संबंधित व्यवहारों को क्रमबद्धीकरण(process) करेगा! ये दळों को हानी पहुंचने से दृष्टि(vision) ख़तम होजायेगा! यहाँ दृष्टि(vision) समाचार को स्मृति का फोटो(photo) का साथ तुलना (comparison) करता है!
यह मनोमयकोश का प्रतीक है!
कनपटी संबंधित दळों(temporal
lobes): ये दोनों कनपटी संबंधित दळों(temporal
lobes), दो पार्श्विक भाग (parietal lobes) दळों और दो
आगे भाग (Frontal
lobes) दळों का नीचे
होता है! संगीत का अनुसार इन दोनों कनपटी संबंधित दळों(temporal lobes) प्रवर्तित करेगा! कानों से समाचार इन दळों का उप्पर भाग में पहुंचेगा अथवा स्वीकार करेगा!
इन दळों(temporal lobes) का नीचे भाग स्मृति वापस मिलने में
प्रमुख(crucial
role) पात्र पोषण करेगा!
कनपटी संबंधित दळों(temporal
lobes) स्मृति(memory), रूचि, शब्द, रूप,
स्पर्श, विषयों को ग्रहण करने में अत्यंत सहायता करेगा!
यह प्राणमयकोश का प्रतीक है!
छोटा भेजा (cerebellum):
भेजा में दूसरा बड़ा भाग है इस छोटा भेजा(cerebellum)! वह बड़ा भेजा का
नीचे, मस्तिष्क(brain stem) स्तंभ का पीछे और मध्य भेजा(midbrain) का साथ जोड़ा हुआहोता है! यह छोटा भेजा(cerebellum) दो अर्थ गोळ(two
hemispheres) में विभाजित है!
इन का उप्पर ग्रे माटेर (gray matter) का तह(outer cortex), और अन्दर सफ़ेद
माटेर(white matter) का तह (inner cortex) होता है! अंग का उप्पर तह को कोर्टेक्स(cortex) कहते है! यह छोटा भेजा(cerebellum) शरीर का अन्दर हर
एक गति का हर वक्त पताकर्त रहता है! उसका अनुसार दिशा निर्देश देते रहता है!
विचार बड़ा भेजा(cerebrum) का है, दिशा निर्देश
छोटा भेजा(cerebellum) का है! बड़ा भेजा(cerebrum) छोटा भेजा(cerebellum) का
बीच में समन्वयकता अत्यंत आवश्यक है!
वॅंट्रिकल्स(Ventricles): ये भेजा में चार होते है! इन में द्रव से भरा हुवा गुहिकायें(cavities) है! ये सब एक का साथ एक जोड़ा हुआ होता है! ये सब वॅंट्रिकल्स(Ventricles) मस्तिष्क मेरुदंड द्रव (Cerebro
spinal fluid – CSF) को तैयार करता है!
तनाव को कम करने द्रव है यह मस्तिष्क मेरुदंड द्रव (Cerebro
spinal fluid – CSF)! पुष्टिकारण (nutrients) पदार्थों को बटवारा (distribute) करना, और व्यर्थं पदार्थों को( to accumulate wastes) एक कट्टा करना भी
इन का काम है!
डैयंसफलान्(diencephalon):
बड़ा भेजा(cerebrum) और मध्य भेजा(midbrain) का बीच में यह डैयंसफलान्(diencephalon) उपस्थित है! थलमस् और हैपोथलमस्(thalamus
and hypothalamus) दोनों
मिलके डैयंसफलान्(diencephalon) कहते है! इन दोनों बड़ा भेजा का दोनों अर्थ गोळों का बहुत गहराई में होता है!
हैपोथलमस्(hypothalamus) का केन्द्रों मनुष्य शरीर का
शीतोष्णस्थिति (temperature), रक्त का शक्कर(blood sugar), बुख़(hunger), और हारमोन (hormones) को नियंत्रण करता है!
थलमस् (thalamus) इन्द्रिय विषयों (sensory
signals) को नियंत्रण करता है! उनमे भी आगे भेजा(higher forebrain) का सामने कपाळ का उप्पर आवरण (cerebral
cortex ) जाने संकेत(signals)
को नियंत्रण करता है! थलमस् (thalamus) प्रेरक संकेतों (motor
signals) को नियंत्रण करेगा! कपाळ का उप्पर आवरण (cerebral
cortex) अधिक गरम होने से रक्षा करेगा! मस्तिष्क स्तंभ (brainstem) का नीचे का प्रेरक क्षेत्र (motor signal centres) केन्द्रों को को और आगे भेजा का (higher ones in the forebrain) संबंध कराने बहुत कुछ छोटा
छोटा मार्ग होता है!
मस्तिष्क स्तंभ(brain stem): यह बड़ा भेजा(cerebrum) का एकदम नीचे(just below), और छोटा भेजा (cerebellum) का सामने उपस्थित है! यह मस्तिष्क स्तंभ(brain stem) उप्पर का बड़ा भेजा(cerebrum), और नीचे का मेरुदंड का साथ जोड़ा हुआ होता है! मध्य भेजा (midbrain), पोंस(pons), छोटा भेजा(cerebellum), और डैयंसफलान्(diencephalon) का साथ जुडा हुआ है! मस्तिष्क
स्तंभ(brain
stem) आदिम
भेजा (most
primitive part of the brain)कहलाता
है! शरीर को स्थितिवंत करने बहुत कुछ कार्य करनेवाला भाग यह मस्तिष्क स्तंभ(brain stem) ही है! उदाहरण के
लिए: श्वासक्रिया(breathing), ह्रदय
स्पंदन(heart beat), रक्तचाप(blood pressure), इत्यादि
में प्रमुख पात्र(major role) इसका ही
है! उल्टी(vomiting), खासी (cough), छीकना(sneezing), और निगलने(swallow) की क्रिया
इन छीजे में प्रमुख पात्र इसका ही है! उप्पर और नीचे का तंत्रिकोशिका केन्द्रों(neuron centres) का बीच का
उपस्थित नाडी रेशाओं(nerve fibres) का मार्ग(make connections) करता है!
यह अन्नमयकोश का प्रतीक है!
लिम्बिक
सिस्टम(limbic system): अपनापन(intimate behaviors), बोवोद्वेग (emotions), बुख़((hunger),
उद्रेक(aggression) स्वभाव, इन सब
का व्यक्तीकरण का कार्यो के लिए लिम्बिक सिस्टम(limbic system) उपस्थित है! समस्त इन्द्रिय विषय समाचार (whole
sensory information) को एक सिनेमा जैसा कपाळ का उप्पर आवरण(cerebral cortex) में प्रदर्शन
करेगा! वह कनपटी का पास भाग (Temporal lobe) का गहराई (deep) में होता है! सिंगुलेट गैरस (cingulate gyrus), कोर्पस कल्लोजम(corpus callosum), मामिल्लारी शरीर (mammillary body), घ्राणेंद्रिय मार्ग (olfactory tract), अमिग्दला(amygdala), और हिप्पोकाम्पस (hippocampus), ये सब लिम्बिक
सिस्टम(limbic system) का भाग(parts of limbic
system) है!
लिम्बिक
सिस्टम(limbic system) विवरण:
अ) अमिग्दला(amygdala): यह बादाम (almond shaped nuclei) जैसा रूपवाला बीच में होने पिंड है! कनपटी का पास भाग (Temporal lobe) का अधिक गहराई का अन्दर, मध्य (medial) हैपोथलमस्(hypothalamus) का पास, और
हिप्पोकाम्पस (hippocampus) का बाजू (side) में उपस्थित है! भाव प्रकटन(emotional response), भाव नियंत्रण (Control of emotions), हारमोनों (hormonal secretions)को निथारना अथवा रिसना, और स्मृति (memory) इत्यादि विषयों में भाग लेता है!
आ) सिंगुलेट गैरस(cingulate gyrus): यह एक कपाळ का फोल्ड (a fold of the brain) है! कोर्पस कल्लोजम (corpus callosum) का उप्पर, और सिंगुलेट सुलसी(cingulate sulci)— कोर्पस कल्लोजम (corpus callosum) का मध्य में उपस्थित है! यह इन्द्रिय प्रोत्साहनों(involved in sensory impulses) का संबंधित है! आक्रामक(aggressive) प्रवर्तन को ठीक करेगा! उसका अनुसार भाव
और प्रतिभावानायें का प्रदर्शन करेगा!
इ) फोर्निक्स(Fornix): यह एक नाडी रेशा समूह
का चाप या अर्थ वृत्त (fibrous band of nerve fibres in an arc) है! हिप्पोकाम्पस (hippocampus) और हैपोथलमस्(hypothalamus) दोनों को जोड़ता है! हारमोनों (hormonal secretions) को निथारना अथवा रिसना करेगा!
ई) हिप्पोकाम्पस (hippocampus): समीप या नर्दिक का अर्थ गोळ बड़ा भेजा (nearest part of the
cerebral hemispheres) में बहुत समय तक
रखने (long-term storage)
समाचार को भेजता है! अवसर का अनुसार उस समाचार को उपसंहरण (withdraw) अथवा वापस लेता है! यह घोड़ा का जुता जैसा(fibrous band of nerve fibres in a horse
shoe) दिखाई
देनेवाला एक नाडी रेशा का समूह है! कनपटी पास भाग (Temporal lobe) में अमिग्दला(amygdala)का पास उपस्थित होता है! नूतन स्मरणों(new memories) को एक् कट्टा करना, भावों (Emotions), और दिशा निर्देशन करना हिप्पोकाम्पस (hippocampus)का कार्य है!
उ)
हैपोथलमस्(hypothalamus): शरीर शीतोष्णस्थिति, भूख(hunger), समस्थिति (homeostasis), प्रेरण(Motivation) और भाव नियंत्रण (emotion control), प्रेरक कार्य (Motor function), जागना-सोना वृत्त (sleep
wake cycle) को ठीक करना इत्यादि कई चीजों में दिशा
निर्देश देगा
हैपोथलमस्(hypothalamus)!
ऊ) कोर्टेक्स (Cortex): यह घ्राणेंद्रिय (olfactory sensory information) समाचार का विषय सेकरण करेगा कोर्टेक्स (Cortex)! यह कनपटी पास भाग (Temporal lobe)में उपस्थित
है!
ऋ)थलमस्(thalamus): यह
ग्रे माटर(grey
matter) का पिंड(mass) है! मेरुदंड (spinal cord), और छोटा भेजा(cerebellum) से इन्द्रिय विषय सेकरण करेगा और वापस समाचार भेजना, और दिशानिर्देश भे
करना इस का काम है! यह टेलेंसेफलुली (telencefalului) का अन्दर, और हैपोथलमस्(hypothalamus) का उप्पर उपस्थित
है! बाधा, सुख, श्रवण(auditory signals), दृश्य(visual), और सोमटो सेंसरी
सिग्नल somatosensory
signals) इत्यादियों को
बड़ा भेजा का कोर्टेक्स (cerebral
cortex) को भेजेगा! उधर से दिशा निर्देश पायेगा!
ए) कोर्पस कल्लोसम(corpus callosum): बड़ा भेजा
cerebral hemispheres) का दोनों अर्थागोळों को सफ़ेद पदार्थ(white matter) मिलादेगा यानी जोडदेगा! इसी को कोर्पस कल्लोसम(corpus callosum) कहते है!
ऐ) कपाळ का उप्पर आवरण (cerebral cortex): यह बड़ा भेजा (cerebrum) बाहर का
आवरण है! उधर मनुष्य का चेतानापूर्वक विचारों, और कार्यो होता है! यहाँ ज्ञानेंद्रियों का समाचार सेकरण का काम
होता है! बड़ा भेजा (cerebrum) का नीचे पीछे रहा दृष्टि आवरण (visual cortex) में हम जोबी देखने चीजों उन सब का विषय सेकरण इधर होता है! बड़ा भेजा (cerebrum)
का उप्पर उपस्थित स्पर्श समूह (band) का शारीरक विषय संकेतों (somatosensory signals) आवरण! इस आवरण में सारे
शरीर का स्पर्शो का विषय सेकरण होता है! इस स्पर्श समूह (band) का शारीरक
विषय संकेतों (somatosensory signals) आवरण का एक दम आगे (just in front) रहा प्रेरक आवरण(motor cortex) उसका अनुसार संकेतों (signals) को मांसपेशियों (muscles) को भेज के उन का गति का सहायता करेगा!
पोंस(PONS): भेजा का अन्दर का (V से VIII) कपाळ नाड़ियों का प्रतिक्रया केंद्र (reflex centre) पोंस(PONS) है! चबाना(chewing), रूचि(taste), सुनाने अथवा श्रोत्रं(Hearing), और समस्थिति (balance) इन सब में भाग लेता है इस पोंस(PONS)!
रेटिकुलर याक्टिवेटिंग सिस्टम (reticular activating system-- RAS):
इस RAS
मस्तिष्क स्तंभ(brain stem) में होता है! ह्रदय (Heart beat) स्पंदन, निद्रा(sleep),
चलना(walking), प्रवर्तन(behaviour), श्वासक्रिया(breathing), इत्यादि में प्रमुख पात्र इस
आर ए यस
(RAS) लेता है! इस आर ए यस (RAS) को ट्रामा( trauma) होने से कोमा (coma) में जाएगा! आरोहण (ascending) आर ए यस (RAS) कपाळ
आवरणाएं, थलमस्(thalamus), और हैपो थलमस्(hypothalamus),
इन से जोड़ता है! अवरोहण(descending) RAS छोटा भेजा (cerebellum), और ज्ञानेंद्रिय नाड़ियों का साथ जोड़ा के काम करेगा! इस का तात्पर्य: आरोहण (ascending) आर ए यस (RAS) बड़ा भेजा(cerebrum) का साथ, और अवरोहण(descending) RAS छोटा भेजा (cerebellum) का साथ काम करेगा!
कण(Cell): हर एक जीवी निर्माणात्मक काम करने के उपयोगकारी
प्राथमिक छीज कण है! कण का आकार पतली(thin), सपाट
समतल(flat), घनाकार(cubic), elongated होता है! हर एक कण में पानी और रासायनिक पदार्थो (chemicals
and water) होता है!हर एक मनुष्य में 100 trillion कणों होता है! हर एक जीएवा कण में अपना जाती को जन्म
देने का समाचार निक्षिप्त होता है!
क्रियायोग साधना का चक्रों में बीजाक्षर ध्यान
प्रक्रिया का माध्यम से कणों का सामर्थ्य को बड़ा सकता है! नूतन जीव कणों का सृष्टि
भी करा सकता है! और कणों में नूतानोत्साह भी सोप सकता है!
क्रियाशक्ति सामर्थ्यत(Action Potentials-AP): नाडी
कणों विद्युत् रासायनिक संकेतों(electrochemical
signals) का माध्यम से काम करता है! इस
को क्रियाशक्ति सामर्थ्यत(Action Potentials-AP) कहते है! सोडियम और पोटाशियम(sodium and potassium
ions) का गति (movements) का कारण से इन AP क्रियाशक्ति
सामर्थ्यत बनाता है! ये कार्य न्यूरान का मेम्ब्रेन (membranes of
neurons) का वजह से होता है!
यह समाचार कण का मध्य केंद्र
में (nucleus) छे बिल्लियन यूनिट दी.एन.ए.(6 billion subunits of DNA) का रूप में निक्षिप्त होता है! इस दी.एन.ए.(DNA) को बुनियादी जोड़ा(base pairs) कहते है! इन बुनियादी जोड़ा(base pairs) 23 जोडों क्रोमोजोम(23 pairs of chromosomes) में पार्सल (pack) किया होता है! एक क्रोमोजोम(chromosome) माता से और एक क्रोमोजोम(chromosome) पिता से लभ्य होता है! वैसा
मिला 46 क्रोमोजोम(chromosomes) 23 जोडों क्रोमोजोम(23 pairs of chromosomes) बनेगा!
याक्सन(Axon):
यह न्यूरॉन (neuron) का लंबा क्रम (long process)है!! याक्सन(Axon)का
माध्यम से करने काम का समाचार (efferent or outgoing potential) को
क्रिया शीलता कहाजाता है! यह क्रिया
शीलता कण शरीर(cell body)
से लक्ष्य कण (target cell)
को लिया जाता है! हर एक नाडी कण (Nerve cell) में एक
याक्सन(Axon)
होता है! यह याक्सन(Axon)
का लम्बाई एक फूट (one feet) तक हो सकता है! याक्सन(Axon)
का अग्र भाग में शाखाये होता है! उन का माध्यम से एक कण से दूसरा कण को समाचार
बदिली या रवाणा किया जाता है! याक्सन(Axon)
का आखरी भाग से स्पंदनों अथवा स्पर्श(impulse/touch)
का माध्यम से दूसरा कण को अथवा आवश्यकत अंग (effector
organ) को
समाचार बदिली या रवाणा(transfer/transport)
किया जाता है!
न्यूरान
एक कपाळ में स्थित महत्वपूर्ण कणों जो समाचार को बदिली या रवाणा(transfer/transport)
करने में उपयोगकारी है!
गामा अमिनो बुतेरिक
आम्ल(Gamma-aminobutyric acid-GABA) एक साधारण
न्यूरो ट्रांसमीटर (very common neurotransmitter)है! यह न्यूरान का
माध्यम से मिलाने समाचार अभ्यंतर व्यक्त(inhibiting the
information) करना इस का प्रथम कर्त्तव्य है!
कण में बहुत भाग होते है! उन में हर एक
भाग को एक काम(function) होता है! कण का कुछ भागों को आर्गनेल्लेस (organelles) कहते है! उन सब महतवपूर्ण निर्माणों (specialized structures) होते है! उन सब कण में ही कुछ महत्वपूर्ण कार्यों करते है! उदाहरण के लिए: कणविभाजन, कणगति, एक पद्धति का अनुसार आर्गानेल्लेस (organelles), और इतर पदार्थो को दिशा निर्देश करना, मालीक्यूल(molecules)को क्रमबद्धीकरण करना, क्रमबद्धीकरण किया हुआ मालीक्यूल(molecules)को उन का अवसर का मुताबिक़ कण का अन्दर अथवा बाहर गम्यों को पहुंचाना,
बाहर से आया हानिकर कीटाणु को (digest foreign bacteria)मार के खाना, खतरनाक(toxic substances) विष पदार्थो को निकालना, ग्लानिमय पदार्थो को ठीक करके पुनः चक्रित करना (recycle), इत्यादि! कण में मिठकेंद्रिया (Mitochondria) आर्गनेल्लेस (organelles) इन दोनों कण का अवसर का अनुसार आहार से शक्ति
उत्पादन करेगा! कण का रूप अथवा
आकार को निर्णय करना, कण विभाजन(cell division) करना, कण का गति निर्देशन करने, इत्यादियों को
सहायता करेगा! वृद्ध, प्राणहीन, और मार खाया हुआ, कणों का स्थान में पुनः नूतन
कणों को यथारीति में रखने कण विभाजन सहायता करेगा! हर एक दिन मनुष्य का शरीर में 2
ट्रिल्लियन
(2 trillion)कण विभाजन वृद्धि होता रहता है!
मिटोसिस (Mitosis cell division)कण विभाजन:
मनुष्य का शरीर में(non-reproductive cells) जीव रहित कणों यानी जो जीव उत्पादन का काम नहीं
करसकता उन कणों को सोमाटिक(Somatic cells) कण कहता
है! चर्म, मांसपेशी (muscles), फेफडो (lungs), ऑतरी (alimentary
canal), और केश कणों को सोमाटिक(Somatic cells) कण कह सकता
है! इन सोमाटिक(Somatic cells) कण विभाजन
को मिटोसिस कण विभाजन(Mitosis cell
division) कहते है! विभाजन हुआ मिटोसिस कण को पुत्रिका कण (daughter cell) कहता है! इस पुत्रिका कण (daughter cell) को डिप्लायिड(diploid cells) कण कहते है! इस डिप्लायिड(diploid cells) कण में उपस्थित दो पूर्ण क्रोमोजोम जोड़ा(sets) माता
क्रोमोजोम जोड़ा(sets) का अनुसारी यानी एक रूप होना होता है! इसी हेतु
वंशा पारम्परिक व्यत्यास (no genetic diversity) इस मिटोसिस (Mitosis cell division)कण विभाजन से नहीं
होगा!
मियोसिस कण विभाजन (Meiosis Cell Division): यह दोस्सरा किसिम का विभाजन् है! इस विभाजन का
हेतु लिंग भेद कणों(sex cells) यानी स्त्री सम्बंधित अंडा यानी शोणित कणों(egg cells-ova) अथवा पुरुष सम्बंधित शुक्ल कणों (male sperm cells) का सृष्टि होता है! मियोसिस कण विभाजन (Meiosis Cell Division) का पश्चात शुक्ल और शोणित कणों दो मिलके दूसरा
जीवस्रुष्टि का मार्ग बनाता है!
टिष्यू (tissue): टिष्यू का अर्थ तंतु है!
सजातीय सारूप्य साकार निर्माण कणों का समूह कोशिकाओं और तंतुओं का
समूह को टिष्यू (tissue) कहते है! विविध अंगों में विभिन्न प्रकार
का टिष्यू (tissue) होते है! एपिथेलियल (epithelial), कनेक्टिव (connective), मांसपेशी (muscular), और नर्वस (nervous tissue) इति चार प्रकार का टिष्यू
(tissue) होते है! इन महत्वपूर्ण टिष्यू (important tissue) का अन्दर उप टिष्यू (sub-tissues) होते है!
एपिथेलियल टिष्यू (epithelial tissue) शरीर का कवच जैसा और अन्दर गुहिकाओं (internal cavities) का आवरण जैसा उपयोगाकारी होता है! रक्षणार्थं, स्राव करने(secretion), सोखने (absorption), और छानने के लिए
उप्योककारी है! उदाहरण के लिए त्वचा एक अंग है! धुल(dust), मिट्टी(dirt), कचडा इत्यादि हानिकर
कीटाणुओं से बचने एपिथेलियल टिष्यू (epithelial tissue) शरीर का रक्षा देता है!
कनेक्टिव (connective tissue)टिष्यू: यह कनेक्टिव (connective tissue) टिष्यू बहुत विस्तृत और विशाल वितरण यानी बांटा हुआ टिष्यू है! साहायता (support),, और रक्षण(protection) के लिए उपयोगी है! साधारण(Ordinary
loose) रूप में ढीली, मोटा(fat), और घना रेशेदार है! उपास्थि(cartilage), हड्डियाँ, रक्त, और लिम्फ(lymph) इन सब चीजो कनेक्टिव (connective tissue) टिष्यू अथवा तंतु का परिगणित में आयेगा!
मांसपेशी तंतु(Muscle tissue)टिष्यू: मांसपेशी तंतु(Muscle tissue) तीन प्रकार का होता है! वे--मृदुल (smooth), अस्थि पञ्जर(skeletal) संबंधी, और ह्रदय(cardiac) संबंधित है! अस्थि पञ्जर संबंधी तंतु ऐच्छिक(voluntary type) रीति काम करने तंतु है! मृदुल (smooth) तंतु रक्त वाहिका(blood vessels) सम्बंधित है! यह अस्वैच्छिक (involuntary type) रीति काम करने तंतु है! ह्रदय(cardiac) संबंधित तंतु केवल ह्रदय (cardiac walls) दीवारों में ऐच्छिक(voluntary type) रीति काम करने तंतु है!
नाडी तंतु(Nerve tissue)टिष्यू: यह
विशेषज्ञ(specialized) काम करने कणों का समूह से बना हुआ है! ये प्रेरण(impulse) प्राप्त करता हैं और उत्प्रेरणों (those
impulses) को शरीर भागो में भेजता भी है! नाडी (Nerve cells or neurons)कणों लंबा और धागा जैसा रूप में होता है!
झिल्ली(membrane): बहुत तंतु(tissues)या टिष्यू का बुनाई से झिल्ली (membrane) बनाता है! ये शरीर को ढकने,
अंगों का रक्षा, और अंगों को विविध भागो में विभाजन करने में सहायता करेगा! उदाहरण
के लिए: बलगम (mucous membrane) झिल्ली(membrane) शरीर का कन्दारो(body
cavities) को रक्षा के लिए एक पद्धती का अनुसार सही रखने में सहायता करेगा!
अंग(Organ): कुछ तंतु(tissues)या टिष्यू मिलके एक अंग(Organ) बनता है! हर एक
विशेष (definite) काम होता है!
व्यवस्था या
सिस्टम (system): कुछ अंगों(Organ) मिलके आखरी में एक व्यवस्था
या सिस्टम (system) बनाता है!
प्रमस्तिष्क वल्कुट (The Cerebral cortex):
बड़ा भेजा(cerebrum) और छोटा भेजा(cerebellum) इन का बाहर का आवरणोंका रक्षा के लिए 1.5 to 5 mm मोटा एक मुख्य तंतु(tissues)या टिष्यू का आवरण क्षेत्र होता है! मुख्य
इन्द्रिय संबंधित समाचार सब यह प्रमस्तिष्क वल्कुट (The
Cerebral cortex) ही लेके क्रमबद्धीकरण(receives and processes) करेगा! उस इन्द्रिय
समाचार सब बड़ा भेजा(cerebrum) का अन्दर का(cerebral lobes- frontal, parietal,
temporal and occipital) सारे लोब्स
में बांटने या वितरण किया(divide and
distribute) जाता है!
हम साधारण रीति में इन कापाळ का अन्दर का ग्रे पदार्थ(gray matter in the brain) का बारे में ही है! उन कापाळ का अन्दर का
क्षेत्रों जहा जहा इन्सुलेषण या ढका (insulation) नहीं वहा वहा का पदार्थ ग्रे (gray colour)रंग में दिखाईदेगा! बाकी कापाळ का
क्षेत्रों जहा जहा इन्सुलेषण या ढका (insulation)हुआ वे क्षेत्रो सफ़ेद(white) दिखाईदेगा! कापाळ का अन्दर का जहा जहा मोड़ा हुआ
क्षेत्रों भी बाह्यातल(surface area), और ग्रे पदार्थ(gray matter area in the brain)को बढादेगा! इस का हेतु क्रमबद्धीकरण करने समाचार भी बढेगा!
केंद्रीय नाडी व्यवस्था या सिस्टम (system) में मेरुदंड(spinal cord) और भेजा को दोनों
को कवर(cover) करते हुए तीन
विविधप्रकार का आवरणों(layers) होते है! इन
आवरणों(layers) को मेनिंजेस (meninges) कहते है! मेनिंजेस (meninges) एक झिल्ली या
पर्दा (membrane system) पद्धति है! वह मेरुदंड(spinal cord) और भेजा(cerebrum) दोनों को पया(pia), अरक् नायिड्(arachnoid), और ड्यूरा(dura matter) पदार्थ इति तीन
प्रकार का आवरणों से घेरा (encircle) डालता है! उस मेनिंजेस (meninges)का उप्पर एक और नाडी रेशा समूह(a fibrous membrane) हड्डियों को घेर
लेगा! ड्यूरा(dura
matter) पदार्थ इस मेनिंजेस (meninges)का तीनों आवरणों
में सब से उप्पर आवरण(layer) है! वह हड्डी
टिष्यू (bone
tissue) का नीचे उपस्थित होता है!
यह ड्यूरा(dura
matter) पदार्थ कुछ समय में भेजा(cerebrum) छिद्रों को भी
कवर (cover)करेगा! इन को साइनस काविटीस(sinus cavities or spaces) कहते है! इस नाडी
तंत्रियो (dural
veinous sinuses) छिद्रों(cavities
or spaces) अन्दर का रक्त,
द्रवों, और मस्तिष्क स्तंभ- भेजा (cerebrospinal
fluid-CSF) द्रव, ये सब गर्दन का बड़ा नाडी(jugular vein)में पहुंचेगा! यह cerebrospinal fluid-CSF अत्यंत स्वच्छ है! यह भेजा आयर मेरुदंड दोनों में घर्षण (friction) नहीं होने देगा! यह कुषण (cushion) जैसा काम करेगा! पोषक पदार्थो(nutrients), रसायनों(chemicals), और व्यर्थो(waste) इन सब को लेने वाहिका इस मस्तिष्क स्तंभ- भेजा (cerebrospinal fluid-CSF) द्रव!
विविध प्रकार आरोग्य परिस्थितियों का यह ड्यूरा(dura matter) हेतु है!
रक्तस्राव(Arterial bleeding) को हेमटोमस(hematomas) कहते है! यह सर्व साधारण अनारोग्य परिस्थिति है!
रक्त (Arterial
bleeding)बहके, स्राव हुआ रक्त ड्यूरा(dura matter) का मध्य में होने
से उस को येपिड्यूरल हेमटोमस(epidural hematoma) कहते है! स्राव हुआ रक्त
ड्यूरा(dura
matter) और अरक् नायिड्(arachnoid) का मध्य में होने
से उस को सब ड्यूरल हेमटोमस(subdural hematoma) कहते है! कुछ शिर
दर्दो का कारण यह ड्यूरा(dura
matter) ही है!
भेजा(cerebrum) का मध्य आवरण (layer) को अरक् नायिड्(arachnoid matter) पदार्थ कहते है!
इस का बाद भेजा-मेरुदंड (cerebro spinal fluid-CSF) द्रव होगा! इस का बाद पया(pia mater)पदार्थ होता ह! यह पया(pia mater)पदार्थ प्रत्यक्ष (directly) रूप में भेजा-मेरुदंड का साथ संपर्क में होगा! रक्त को भेजा को पहुन्चादेगा! रक्तावाहिकावों(blood vessels) को सहायता करेगा! इसी को वास्कुलरैजेषन (vascularisation) कहते है! यह भेजा-मेरुदंड (cerebro spinal fluid-CSF) द्रव का निर्माण में
सहायता करेगा! भेजा का चारों ओर घेर के एक कवच जैसा रक्षण देगा!
अरक् नायड(arachnoid matter) पदार्थ और पया(pia mater)पदार्थ इन दोनों बीच का पदार्थ को सबअरक् नायड(subarachnoid matter)पदार्थ कहते है! इ
में भेजा स सबअरक् नायड(subarachnoid matter)पदार्थ में भेजा-मेरुदंड (cerebro spinal fluid-CSF) द्रव प्रवाहित होता
है! यह CSF द्रव शरीर का खर्च
करने का CSF द्रव से अधिक उत्पादन
होता है! शरीर अपना अवसर के लिए CSF द्रव उपयोग करने का पश्चात बचा हुआ द्रव को शरीर पुनः सोख(absorb) लेता है! यह द्रव
पुनः रक्तप्रवाह में मिलजायेगा! अथवा लिम्फ व्यवस्था,(lymphatic system via cranial nerves and spinal
nerve roots)भेजा, और मेरुदंड में
उपस्थित नाडी मूलों का माध्यम से शरीर बहिष्कृत करता है! वह रक्तप्रवाह में
गिरेगा, शरीर पुनःसोख(absorb) लेगा, ऐसा निरंतर होता रहेगा!
भेजा और मेरुदंड इन दोनों में हर जगह भेजा-मेरुदंड (cerebro spinal fluid-CSF) द्रव का थैले होते
है! उन को अरक नायड(arachnoid cisterns)हौदी कहते है! कभी कभी इस हौदी का आस पास में सिस्ट्स(cysts)बनता है! शिशुदशा या शिशुप्राय(infancy state) में ही इन सिस्ट्स(cysts) बनता है! साधारण रीति में इन सिस्ट्स(cysts) अपना प्रभाव (influence) को किशोरावस्था(adolescence) में दिखादेगा! अरक नायड(arachnoid cysts)) सिस्ट्स मेरुदंड का उप्पर आनेसे, वे सिस्ट्स(cysts) राडीक्युलोपति (symptoms of radiculopathy) लक्षण की हेतु होगा! इन लक्षण सब सयाटीका(sciatica), डिस्क बीमारियाँ (disc diseases), का बीमारियों का हेतु होगा! परंतु इन सब बीमारियों का मेहवात(osteoarthritis ) बीमारियों भी कारण हो सकता है!
अन्दर का भेजा(The Inner Brain): मेरुदंड और
भेजा का दोनों अर्थ गोळों (cerebral hemispheres) का बीच में परस्पर समन्वयता अत्यंत अवसर
है! इस के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्लिष्ट निर्माणों (very important structures) भेजा का अन्दर है! हमारा भाव समन्वयता(emotional state) के लिए इन निर्माणों (structures) सहायभूत होते है! दोनों अर्थ गोळों (cerebral hemispheres) का अन्दर में उपस्थित लोब्स(lobes) जैसा ये निम्न लिखित निर्माणों (structures) भी जोड़ा(pairs) में होता है! जोड़ा(pair) में एक निर्माण दूसरा का प्रतिरूप है!
हैपोथलामस(Hypothalamus): यह एक मोती परिमाण में(size) होता है! यह प्रातः हम को उठाता है!
अड्रिनालीन (adrenaline)को प्रवाहित करता है! यह संतोष, दुःख,
क्रोध, इत्यादियो का भावकेन्द्र है!
थलामस(thalamus): हैपोथलामस(Hypothalamus) का साथ ही थलामस(thalamus) होता है! यह मुख्या समाचार घर(major clearinghouse) है! मेरुदंड से भेजा को, और भेजा से
मेरुदंड को समाचार बटवारा(transport) करने समाचार
केंद्र है!
हिप्पोकाम्पस(hippocampus): यह छोटा नब(nub) स्मृति अनुक्रमणिका (memory indexer) जैसा काम करेगा! स्मृतियों अथवा(memories) यादों को अधिक समय दोनों अर्थ गोळों (cerebral hemispheres) का अन्दर में स्मृति भंडार(store)में रखेगा, और अवसर
होने पर बाहर निकालके सही प्रदेशों में भेजदेगा!
बासल गांग्लिया(basal ganglia): यह एक नाड़ि कणों (nerve
cells group) का समूह है! ये सब
थलामस(thalamus) को घेर के रखता
है! वे गति निर्देशन करेगा!
जोड़ना (Making Connections):
भेजा और बाकी नाडी व्यवस्था (nervous system) या सिस्टम
सब विविध प्रकार का नाडी कणों से बना होता है! काम करनेवाला प्राथमिक नाडी कण को
न्यूरान(neuron) कहते है! सब
इन्द्रिय विषयों, गति, विचारों, यादों, और भावों भी सब इन नाडी कणों का माध्यम से ही प्रवाहित होता है! कण
में कण केंद्र, डेंड्रैट(Dendrites), याक्सन(axons) होते है!
न्यूरान(neuron) या कण जीने
के लिए, और काम करने
का अवसर का अनुसार मालीक्यूल(molecules) उत्पादन(produce) किया होता है! एक वृक्ष का शाखा(branch) जैसा ये
डेंड्रैट(Dendrites), बाहर की ओर
व्याप्ति (spread) हुआ होता
है! इतर कणों से समाचार सेकरण करता है! उस सेकरण किया समाचार को याक्सन(axons) का माध्यम
से दूसरा न्यूरान(neuron)को बदल दिया
जाता है! वह मांसपेशीय कण (muscle cell) अथवा दूसरा अंग(organ) का कण हो, न्यूरान(neuron) और सारे
बहुत सहायकारी कणों से घेरा (encircled)
हुआ होता है! समाचार लेजानेवाले याक्सन(axons) न्यूरान(neuron) का चारों
ओर विविध प्रकार का कवच जैसा कणों रक्षण के लिए घेरा हुआ होता है! उस को
इंसुलेटिंग (insulating sheath) आवरण कहते
है! इस इंसुलेटिंग (insulating sheath) आवरण में एक
चर्बी (fat or thick) या मोटा
मालीक्यूल(molecule) होता है!
इस को मायालिन (myelin)कहते है! ये
समाचार लेजानेवाले याक्सन(axons) न्यूरान(neuron) को रक्षण
लभ्य करा के, उस नदी
संकेत बहुता दूर तक शीघ्रगति से सफ़र करने सत्ता भी लभ्य करेगा! याक्सन(axons) न्यूरान(neuron) छोटा या
बड़ा कद(length) का हो सकता
है! छोटा कदवाला(length) याक्सन(axons) न्यूरान(neuron) कोर्टेक्स(cortex) का अन्दर
से एक कण से (केश का मोटा जितना) अल्प दूर
में उपस्थित कण में समाचार लेजानेवाले होसकता है! लंबा कदवाला(length) याक्सन(axons) न्यूरान(neuron) भेजा से
मेरुदंड का माध्यम से दूर में रहा प्रदेशों को भी समाचार लेजानेवाले होसकता है!
कण(neuron) से दूसरा कण (cell) को समाचार
पहुँचने प्रदेश को सिनाप्स (synapse)
कहते है! संकेत (signal)
समाचार लेजानेवाले याक्सन(axon) का मूल(corner) को पहुँचने का पश्चात छोटा छोटा समाचार थैलियों(sacs) में छोड देता
है! इन थैलियों(sacs) का माध्यम
से न्यूरो ट्रांसमीटर(neurotransmitters) नाम का
रसायनों(chemicals) को सिनाप्स
(synapse) में
छोडदेगा! न्यूरो ट्रांसमीटर(neurotransmitters)
नाम का रसायनों(chemicals) सिनाप्स (synapse) को पार
करके पात्रों(receptors) में संचित (accumulate) होता है! तत
माध्यम से समीप कणों(neighbouring
cells) में संचित
(accumulate) होता है! इन
पात्रों(receptors) स्वीकरण (receiving cells) करनेवाले
कणों का लक्षणों को बदल सकते है! स्वीकरण (receiving cells) करनेवाले कण कण(neuron) होने से ही
संकेत (signal) या समाचार(information) दूसरा कण
में पहुंचेगा!
डी.यन्.ए. (DNA): कण में डी.यन्.ए. (DNA) होता है! डी.यन्.ए. (DNA) में (Genes)जेने होता
है! हर कण में रसायनों, और जल(chemicals
and water), होता है!
अपना जाती का जीव का सृष्टि करने अवसर समाचार निक्षिप्त होता है!
कण का मध्य (nucleus)में इस
समाचार डी.यन्.ए. (DNA) मालीक्यूल(molecule) का रूप में
निक्षिप्त होता है! इन(DNA) मालीक्यूल(molecules) को जेनेटिक पदार्थो (genetic material) यानी ईट(bricks)जैसा
बुनियादी जोडों(base pairs) कहते
है! इन आपस में मिलके लंबा जंजीरों(very long chains) जैसा बनेगा! एक लंबा जंजीर एक क्रोमोजों(chromosome) बनेगा! एक लंबा जंजीर क्रोमोजों(chromosome) में (33.5
million of these DNA units) बहुत सारे(DNA) मालीक्यूल(molecules) होते है! इन बुनियादी जोडों(base
pairs) 23 जोड़ा क्रोमोजों(chromosome) में (23 pairs
of chromosomes) पार्सल (pack) किया होता है! एक क्रोमोजों(chromosome) माता से और एक क्रोमोजों(chromosome) पिता से संक्रमित (inherit) होता है! ऐसा 46 क्रोमोजों (chromosomes) 23 जोड़ा क्रोमोजों (23 pairs
of chromosomes) बनता है! इन लंबा जंजीर(chain) जैसा क्रोमोजों (chromosomes) में कुछ छोटा छोटा प्रदेशों को जेनेस (genes) इति पहचान(recognized) किया है! इन
छोटा प्रदेशों कई हजारों डी.यन्.ए. (DNA) इकाई(units) से बनता है! एक जीवी में उपस्थित समस्त
जेनेटिक(whole genetic
material) पदार्थो को जेनोम् (genome) कहते है! डी.यन्.ए. (DNA) को deoxyribonucleic acid कहते
है!
डी.यन्.ए.(DNA)अन्दर का समाचार सब एक गुप्त(code) रीति में
चार रासायनिक क्षारों (chemical bases) में बनाया होता है! वे—अडेनैन् (adenine-A), गुयानैन(guanine G), सिटोसैन्(cytosine C), और थैमस्(thymine T)! मनुष्य डी.यन्.ए.(DNA) में 3 बिल्लियन् (billion bases) बुनियादी जोडों(base pairs) होते
है! 99% बुनियादी
जोडों(base pairs) सब एक ही जैसाहोता है! बुनियादी जोडों(base
pairs) का
मिलाप (union) का अनुसार समाचारभाव होता है!
अडेनैन् (adenine-A) हमेशा
थैमस्(thymine
T) का साथ जोड़ा मिलाता है! सिटोसैन्(cytosine C) हमेशा
गुयानैन(guanine G) साथ स्नेह
या मित्रता करता है! हर एक क्षार(chemical base) एक शक्कर
मालीक्यूल(sugar
molecule) और फास्फेट मालीक्यूल(phosphate molecule) का साथ
जोड़ा हुआ होता है! क्षार(chemical base)शक्कर
मालीक्यूल, शक्कर
मालीक्यूल(sugar
molecule), और फास्फेट
मालीक्यूल(phosphate
molecule) इन तीनों मिलाके न्यूक्लियाटैड् (nucleotide) कहते है!
डी.यन्.ए.(DNA) मालीक्यूल
अपने आप को उसी तरहा replicate का (DNA) मालीक्यूल
को सृष्टि करा सकता है!
जेनेस्(Genes):
ये जेनेस्(Genes) प्राथमिक(fundamental) है! मनुष्य शरीर में 20,000 से 25,000 जेनेस्(Genes) उपस्थित है करके शास्त्रवेत्तोम् ने
भावना (idea) लगाया! इन में केवल 3% जेनेस्(Genes) का काम अभी तक समझकरसका! शेष 97% जेनेस्(Genes) का काम में अभी तक स्पष्टता नहीं
निर्धारण करसका! जेने(Genetic material) का बिना जीवन नहीं है! सर्व कणों का
प्राथमिक(fundamental) यूनिट्स(units) सभी को इन
जेनेस्(Genes) नियंत्रण (control/regulate all these fundamental units) करेगा! सारे निर्माणात्मक कार्यो को ये
निर्धारण करेगा! इतना ही नहीं, वे गुणों(qualities), नाडी कणों का रसायनों(neurochemicals), और बयो रसायनों (biochemical) कोभी ये ही निर्धारण करेगा! डी.यन्.ए.(DNA) में जेने होता है! यह हर एक कण केंद्र (nucleus) में निक्षिप्त है! जेने डी.यन्.ए.(DNA) का कद यानी लम्बाई है! हर एक जेने(Gene) को एक अलग कोड (special code) होता है! उदाहरण के लिए प्रोटीन
इन्सुलिन(specific protein) को एक अलग कोड (special code) है!
क्रोमोजों(Chromosomes):
मनुष्य का शरीर में डी.यन्.ए.(DNA) मालीक्यूल(molecules) एक का साथ एक जोड़ने से एक
पतला 6000
मिलियन (million)मैल(mile) लंबा बनसकता है! एक मिलियन (million) दस लाख (10 lakhs) का समान (equal)है! इस
मुख्य पदार्थ हिस्टोम्स (histones) नाम का प्रोटीनों(proteens)का चारों ओर
बहुत टैट पार्सल किया (tightly packed around) होता है! इन निर्माणों(structures)को क्रोमोजों(Chromosomes) कहते है! मनुष्य जाती में 23 जोड़ा क्रोमोजों (pairs of chromosomes) हर एक कण(cell) में उपस्थित होता है! आनेवाला शिशु स्त्री या पुरुष निर्धारित
करनेवाला क्रोमोजों को सेक्स क्रोमोजों (sex
chromosomes) कहते है! (XY) होने से पुरुष शिशु, (XX) होने से स्त्री शिशु का जन्म होगा! शेष
क्रोमोजों (chromosomes) को आटोजोम्स(autosomes)
कहते है! सब से बड़ा क्रोमोजों (chromosome) में 8000 जेनेस(genes) होता है! सब से छोटा क्रोमोजों (chromosome) में 300 जेनेस् (genes) होता है!
प्रसरण
व्यवस्था या सिस्टम(Circulatory system):
इस
प्रसरण व्यवस्था या सिस्टम(Circulatory
system) में बहुत सारे अंगों मिल
के काम करेगा! उस वजह से रक्त, पुष्टिकारक(nutrients)पदार्थो, हारमोनों (harmones), प्राणवायु (Oxygen),और शेष वायुवों, एक कण (कणों) से दूसरा कण (कणों) में परिसंचरण करेगा! परिसंचरण
सिस्टम(Circulatory system) बिना इस शरीर रोगों को निरोध नहीं करसकेगा और परिस्थितियों
को ठीक नहीं करसकेगा! उदाहरण के लिए परिसंचरण सिस्टम(Circulatory
system) नहीं होने से शरीर अपना समस्थिति (homeostasis) खो
बैठेगा! क्रमशः मरण संभवित होगा!
रक्त एक पद्धति का अनुसार परिसंचरण करने को, शरीर का अन्दर का व्यर्थो, विष पदार्थो, और हानिकर पदार्थो
को विसर्जन करने को क्रियायोग प्राणायाम ही शरण्य है!
परिसंचरण सिस्टम(Circulatory system) विवरण:
परिसंचरण सिस्टम(Circulatory system) को कार्डियो वास्कुलर सिस्टम (cardiovascular system) करके भी कहते है! इस में ह्रदय (heart –cardio vascular), फेफडो(lungs-pulmonary), आर्टेरीस(arteries), वैन्स (veins), करोनारी और पोर्टल (coronary and portal vessels -systemic) वाहिकाएं सब मिलके
एक साथ काम करेगा!
आर्टेरीस(arteries), और वैन्स(veins): ह्रदय से प्राणवायुसहित (oxygenated
blood) रक्त को
लेजाने रक्तवाहिकायों(blood vessels) आर्टेरीस(arteries) कहते है! ह्रदय को प्राणवायुरहित (deoxygenated blood) रक्त को लेजाने रक्तवाहिकायों(blood vessels) वैन्स(veins) कहते है!
ये आर्टेरीस(arteries) पलमनरी आर्टेरीस(pulmonary arteries) और सिस्टमिक आर्टेरीस (systemic arteries) करके दो प्रकार का होते है! पलमनरी
आर्टेरीस(pulmonary arteries) प्राणवायुरहित (deoxygenated blood) रक्त को ह्रदय से फेफडो(lungs) में शुभ्र करानेके
लिए लेजानेवाले रक्त वाहिकाएं(blood vessels) है! सिस्टमिक
आर्टेरीस (systemic arteries) प्राणवायुसहित (oxygenated blood) रक्त को ह्रदय से इतर(other organs) अंगों में लेजानेवाले रक्त वाहिकाएं(blood vessels) है! आर्टेरीस (arteries) का इतर सूक्ष्मवाहिकायोम् को
आर्टेरियोल्स(Arterioles) और
कापिलारीस (capillaries) कहते है!
ये अंग का अन्दर का सूक्ष्म और अति सूक्ष्म भागो में रक्त लेजानेवाले रक्त
वाहिकाएं(blood vessels) है!
ये वैन्स(veins) पलमनरी वैन्स (pulmonary veins) और सिस्टमिक वैन्स (systemic veins) करके दो प्रकार का होते है! पलमनरी वैन्स (pulmonary veins) एक जोड़ा(set or pair) वैन्स (veins) है! ये जोड़ा प्राणवायुसहित (oxygenated blood) रक्त को फेफडो(lungs) से ह्रदय को
लेजानेवाले रक्त वाहिकाएं(blood vessels) है! सिस्टमिक
वैन्स (systemic veins) प्राणवायुरहित (deoxygenated blood) रक्त को शरीर से ह्रदय को लेजानेवाले रक्त वाहिकाएं(blood vessels) है! पलमनरी वैन्स (pulmonary veins) और सिस्टमिक वैन्स (systemic veins) दोनों बाहर से देखसकता (superficial) है! इस का तात्पर्य ये है की हाथों या
पैरों(on hands and legs one can touch and feel) का उप्पर स्पर्श करके फील करसकता है! अथवा शरीर का अन्दर गहरा में रह के (embedded deep inside the body) नहीं भी देखसकता है!
ह्रदय(Heart):
ह्रदय
वास्तव में एक मांसपेशी(a muscle) है! यह एक नल्ला (tap) जैसा रक्त को पूरा शरीर में
बटवारा करती है! ह्रदय में उप्पर दो
और नीचे दो कवाटे(chambers) कुल मिलाके चार कवाटे(chambers) होते है!
उप्पर में बाए और दाहिने आट्रिया(atria), और नीचे में बाए
और दाहिने वेंट्रिकल्स(ventricles) है! रक्तवाहिकाएं(Blood vessels) इन कवाटों से रक्त को बाहर लेजाते है!
प्राणवायुसहित (oxygenated
blood) रक्त
फेफडो(lungs) से ह्रदय को
लेजाना होता है! उस रक्त ह्रदय से सारे शरीर में बटवारा (distribute) किया जाता है! इस प्राणवायुसहित (oxygenated
blood) रक्त
कोशिकाओं और तन्तुओं का समूह(tissues) को प्राणवायु (oxygen) वितरण(distribute) किया जाता है! पश्चात प्राणवायुरहित (deoxygenated blood) रक्त ह्रदय में पहुंचता है! वहा हृदय में पुनः प्राणवायुसहित (re-oxygenated) रक्त बनजाता है! इस प्रक्रिया के लिए प्राणवायुरहित (deoxygenated blood) रक्त फेफडो(lungs) में लेजाना होता है! वहा
कार्बन डयाक्सैड्(carbon dioxide) रक्त से निकालादिया (removed) होता है! प्राणवायु (oxygen) रक्त में जोडाहुआ (added)
होता है!
दाहिने:
नीचे और उप्पर भाग (inferior and superior vena cava) बड़ा नाडी (vena cava Veins) का माध्यम से प्राणवायुरहित (deoxygenated blood) रक्त ह्रदय का आगे तरफ दाहिने ओर आट्रियम(right atrium) में पहुंचेगा! वहा से ट्रिकुस्पिड वाल्व (tricuspid valve)का माध्यम से दाहिने वेंट्रिकिल्स(right ventricles) में पहुंचेगा! उस प्राणवायुरहित (deoxygenated blood) रक्त पल्मनरी वाल्व(pulmonary
valve) का माध्यम से फेफडो(lungs) में पहुंचेगा! उधर रक्त का कार्बन डयाक्सैड्(carbon dioxide) रक्त से निकालादिया (removed) होता है! प्राणवायु (oxygen) रक्त में जोडादिया (added)
होता है!
बाए तरफ(Left side): पल्मनरी वेइन्(pulmonary
vein) इस
प्राणवायु (oxygen) जोडाहुआ
(added) रक्त को बाए तरफ(left atrium) आट्रियम में पहुंचादेगा! ऐसा शुद्धि हुआ स्वच्छ रक्त (clean blood)को
मिट्रल
वाल्व(mitral valve) का
माध्यम से अरोटा (aorta) वाल्व(valve) का माध्यम से पूरा शरीर में वितरण (distribution) किया जाएगा!
वेंट्रिकल्स(ventricles) भरने के और मिट्रल वाल्व(mitral valve)
ट्रिक्युस्पिड् वाल्व (tricuspid valves) दोनों
बंद होजाता है! वेंट्रिकल्स(ventricles) भरने से अथवा पम्प (pump) करने समय में रक्त पीछे आट्रिया(atria) में वापस नहीं जाने
के हेतु इस प्रक्रिया सहायता करता है! ह्रदय(heart), फेफडो
(lungs),
और शरीर भागो में (body parts) बटवारा (distribute) करने का इस पद्धति या तरीका
मनुष्य का जीवितपर्यंत होता ही रहता है!
हृदय स्पंदन(heart beat):
आट्रिया(atria), और वेंट्रिकल्स(ventricles) दोनों एक का बाद एक(alternately) निरंतर
बंद होना(contract -squeeze) और पम्प (pump) करने काम करते रहता है! वेंट्रिकल्स(ventricles) बंद
होने से रक्त अन्दर आयेगा! अथवा पम्प (pump) करने से रिलाक्स(relax) होक
बाहर को भेजा जाएगा! इसी को हृदय स्पंदन(heart beat) कहते है! हृदय स्पंदन(heart beat)
विद्युत् इम्पल्स (electrical impulses) या प्रोत्साहन का (electrical impulses)
माध्यम से ही होता है! इन विद्युत् इम्पल्सों (electrical impulses)
ह्रदय में एक विशेष मार्ग (a special pathway) का माध्यम से आरंभ होगा! इसीको ट्रिग्गरिंग(triggering) होता है! ह्रदय में इस विद्युत् व्यवस्था (electrical system) इस विद्युत् शक्ति का मूल (source) है! हृदय
स्पंदन(heart beat)को शक्ति देनेवाला यह ही है!
अनाहत और विशुद्ध चक्रों में बीजाक्षर ध्यान करने से हृदय संबंधित
व्याधियों और बाधाओं को निवारण करसकते है! और शांति मिलेगा!
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