क्रियायोगसाधना—विष्णुसहस्रनामम् बीजमंत्रविवरणअर्थ
क्रियायोगसाधना—विष्णुसहस्रनामम् ॐ श्री योगानन्दगुरु परब्रह्मणेनमः श्री विष्णुसहस्रनाम का अर्थ परमात्माको अनेक नामो से ध्यान करना! परमात्मा को पाने के लिए दो ही मार्ग है! चंचल मन को स्थिर करो अथवा चंचल श्वास को स्थिर करो! चंचल श्वास को स्थिर करने से चंचल मन स्थिर हो जायेगा, इसी को प्राणायाम करते है! यह साधको को सुलभ मार्ग है! चंचल मन स्थिर करने से चंचल श्वास स्थिर हो जायेगा! यह ज्ञान मार्ग है! यह कठिनतर मार्ग है! परमात्मा को अनेक नामो से ध्यान करने से मन स्थिर होजायेगा! परमात्मा प्राप्त आसान हो जायेगा! हरि सत तत ॐ सत का अर्थ सत्ताधारी है, सत का ही किरणों ही इस माया करके गोळ मी गिर रहे है! उस गोळ का अन्दर का किरणों को तत कहते है! वे जब विकेन्द्रीकरण करने समय ॐ करके शब्द का साथ हरी यानी नाश होनेवाला सृष्टि बनता है! सम...