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Spl kriya techniques part 1 in Hindi

क्रियों का अनुष्ठान पद्धति:--         मेरुदंड मे मूलाधार चक्र का नीचे कुंडलिनी शक्ति रहती है! मूलाधार चक्र को सहदेव चक्र कहते है! गुदास्थान में 31/2     मूलाधारचक्र के साथ चटा हुआ निद्राण स्थिति मे रहनेवाला कुंडलिनी प्राण शक्ती ही द्रौपदी! क्रिया योग साधना से कुंडलिनी जागृती होंकर योगी का  चक्रों को शक्तिशाली करती है! मेरुदंड मे तर्जनी अंगुली का नाखून वाली जोड़  का नाप से अढय नाखून वाली जोड़ का उप्पर स्वाधिष्ठानचक्र है जिसको नकुलचक्र कहते है!  नाभि का पीछे मेरुदंड मे मणिपुरचक्र है जिसको अर्जूनचक्र कहते है! ह्रुदय का पीछे मेरुदंड मे अनहतचक्र है जिसको भीमचक्र कहते है! ह्रुदय का पीछे मेरुदंड मे विशुद्धचक्र है जिसको युधिष्ठिरचक्र कहते है! दोनों भ्रुकुटी का बीच मे कूटस्थ मे है आज्ञाचक्र है जिसको श्री कृष्णचक्र कहते है! मस्तिष्क का बीच मे ब्रह्मरंध्र का नीचे है सहस्रार चक्र है जिसको श्री परमात्मचक्र कहते है!  कारण चेतना का निलय है आध्यात्मिक मेरुदंड संबंधित चक्रों! इस चक्रों द्वारा आत्म अपना चेतना को व्...